हम उनके दिल की धड़कन में तो रहते हे
पर उनके घर में कोई और बसता हे
ज़माने क रीत हे अजीब जो दो फूल खिले साथ साथ
खिलते ही मुकद्दर उनका माली तय करता हे
सीने में मोहब्बत तो पलती हैं
पर ये जो दिल तनहा है वो तड़पता है
दिल पर काबू पाने क कोसिस क बहुत
पर ये खमबख्त धडकना भी तो नहीं छोड़ता
Thursday, January 22, 2009
सुराख़
सुराख़
मेरी छत की दीवार पर
दो सुराख़ हैं.
जाने कितनी दफा
भर चुकी हूँ इन्हें,
पर हर बरस,
बरसात में,
उघड ही जाते हैं
और इनसे रीसता पानी
वक़्त-बेवक्त टपक
रुसवा कर जाता है,
सरेआम!
शुक्र है, ये बरसात
बारहों- मास् नहीं रहती!
पर इन दो सुराखों का क्या करुँ?
कैसे भरूँ इन्हें,
के तेरे दर्द की
नुमाइश ना हो?
इस ओर तो
मौसम भी नहीं बदलता!
और बदले भी कहाँ से?
मेरा तो आफताब भी
तू ही था.
तेरे बाद अब
किसके लगाऊं फेरें,
के दिन फिरें...?
'कुछ बदलेगा'
ये उम्मीद भी अब
बुझ चुकी.
बाकी है...तो बस,
यही दुआ
के 'अब के बरस
ये बरसात
मेरी साँसे भी बुझां दे
और ये सुराख
हमेशा हमेशा के लिए
बंद हो जाएँ....!!'
मेरी छत की दीवार पर
दो सुराख़ हैं.
जाने कितनी दफा
भर चुकी हूँ इन्हें,
पर हर बरस,
बरसात में,
उघड ही जाते हैं
और इनसे रीसता पानी
वक़्त-बेवक्त टपक
रुसवा कर जाता है,
सरेआम!
शुक्र है, ये बरसात
बारहों- मास् नहीं रहती!
पर इन दो सुराखों का क्या करुँ?
कैसे भरूँ इन्हें,
के तेरे दर्द की
नुमाइश ना हो?
इस ओर तो
मौसम भी नहीं बदलता!
और बदले भी कहाँ से?
मेरा तो आफताब भी
तू ही था.
तेरे बाद अब
किसके लगाऊं फेरें,
के दिन फिरें...?
'कुछ बदलेगा'
ये उम्मीद भी अब
बुझ चुकी.
बाकी है...तो बस,
यही दुआ
के 'अब के बरस
ये बरसात
मेरी साँसे भी बुझां दे
और ये सुराख
हमेशा हमेशा के लिए
बंद हो जाएँ....!!'
शब्दों को मरते देखा है
शब्दों को मरते देखा है.......
दहाडों को डरते देखा है,
वसंत को झरते देखा है
अपने ह्रदय के एक कोने में,
हमने शब्दों को मरते देखा है।
रफ्तारों को थकते देखा है,
कलमों को रुकते देखा है,
अपनी आंखों के किनारों से
हमने शब्दों को बहते देखा है।
आधारों को ढहते देखा है,
तूफानों को भी, सहते देखा है,
रातों में उठ उठ कर,
हमने शब्दों को टहलते देखा है।
राहों को चलते देखा है,
साँसों को थमते देखा है,
अपनी बर्फीली सोंचों में भी,
हमने शब्दों को जलते देखा है।
भँवरे को कलियाँ, मसलते देखा है,
'करीब' को फासलों में बदलते देखा है,
अपने मन के रेगिस्तानों में भी,
हमने शब्दों को चरते देखा है।
आत्मा को भी मरते देखा है,
इश्वर को भी डरते देखा है,
हाँ! मेरी कोख में भी कभी शब्द हुआ करते थे,
मैंने इक इक करके, सबको मरते देखा है।
वसंत को झरते देखा है
अपने ह्रदय के एक कोने में,
हमने शब्दों को मरते देखा है।
रफ्तारों को थकते देखा है,
कलमों को रुकते देखा है,
अपनी आंखों के किनारों से
हमने शब्दों को बहते देखा है।
आधारों को ढहते देखा है,
तूफानों को भी, सहते देखा है,
रातों में उठ उठ कर,
हमने शब्दों को टहलते देखा है।
राहों को चलते देखा है,
साँसों को थमते देखा है,
अपनी बर्फीली सोंचों में भी,
हमने शब्दों को जलते देखा है।
भँवरे को कलियाँ, मसलते देखा है,
'करीब' को फासलों में बदलते देखा है,
अपने मन के रेगिस्तानों में भी,
हमने शब्दों को चरते देखा है।
आत्मा को भी मरते देखा है,
इश्वर को भी डरते देखा है,
हाँ! मेरी कोख में भी कभी शब्द हुआ करते थे,
मैंने इक इक करके, सबको मरते देखा है।
वो चाँद चखाने वाली
अबे ओ सुन बे गरीब,
क्यों रोज़ यहाँ तू आता है,
चाँद ताकता है बेफिक्री से,
फुटपाथ पर बैठ कर फिर ,
बीङी सुलगाता है,
बता तो ज़रा,
कितना कमाता है
कि बेफिक्री खरीद लाता है|
बोला वो गरीब,
बेफिक्री पँहुचाने रोज़ ,
चाँद मेरी झोंपङी तक आता है,
रख लेती है एक बर्तन में,
चाँद को फिर मेरी औरत|
चम्मच में भरकर कभी,
थाली में परोसती है चाँद मेरी औरत|
बूढी माँ को दवा की शीशी में,
चांद भर कर देती है मेरी औरत|
बच्चो को खेलने के लिये,
चाँद खिलौना ला देती है मेरी औरत|
छोटे-छोटे टुकङों में चाँद को काटकर,
कितनी ही टाफियाँ बना देती है मेरी औरत|
कभी-कभी बोतल में भरकर,
चाँद को नशीला बना देती है मेरी औरत|
रोज़ मेरे खाली बटुए में,
एक चमकता चाँद रख देती है मेरी औरत|
थकी हुई आँखों में नींद बुलाने को,
दो बूंद चाँद आँख में डाल देती है मेरी औरत |
बूढे हो चले मेरे चेहरे को,
चाँद कह्ती है पगली सी मेरी औरत|
जो पूछा मैने फिर,
है कहाँ,
दिखती नही चाँद चखाने वाली तुम्हारी औरत|
वो हँसा और इशारा कर बोला,
लाल गाङी वाले उस बंगले में,
तवे पर चाँद सेकने गयी है मेरी औरत|
उस बङे घर के बङे और बच्चों को,
थाली में चाँद परोसने गयी है मेरी औरत|
उस घर में बेफिक्री घुटती है,
खुली हवा में दिलाने को साँस,
उसे साथ ले आयेगी मेरी औरत|
चाँद ताकता है बेफिक्री से,
फुटपाथ पर बैठ कर फिर ,
बीङी सुलगाता है,
बता तो ज़रा,
कितना कमाता है
कि बेफिक्री खरीद लाता है|
बोला वो गरीब,
बेफिक्री पँहुचाने रोज़ ,
चाँद मेरी झोंपङी तक आता है,
रख लेती है एक बर्तन में,
चाँद को फिर मेरी औरत|
चम्मच में भरकर कभी,
थाली में परोसती है चाँद मेरी औरत|
बूढी माँ को दवा की शीशी में,
चांद भर कर देती है मेरी औरत|
बच्चो को खेलने के लिये,
चाँद खिलौना ला देती है मेरी औरत|
छोटे-छोटे टुकङों में चाँद को काटकर,
कितनी ही टाफियाँ बना देती है मेरी औरत|
कभी-कभी बोतल में भरकर,
चाँद को नशीला बना देती है मेरी औरत|
रोज़ मेरे खाली बटुए में,
एक चमकता चाँद रख देती है मेरी औरत|
थकी हुई आँखों में नींद बुलाने को,
दो बूंद चाँद आँख में डाल देती है मेरी औरत |
बूढे हो चले मेरे चेहरे को,
चाँद कह्ती है पगली सी मेरी औरत|
जो पूछा मैने फिर,
है कहाँ,
दिखती नही चाँद चखाने वाली तुम्हारी औरत|
वो हँसा और इशारा कर बोला,
लाल गाङी वाले उस बंगले में,
तवे पर चाँद सेकने गयी है मेरी औरत|
उस बङे घर के बङे और बच्चों को,
थाली में चाँद परोसने गयी है मेरी औरत|
उस घर में बेफिक्री घुटती है,
खुली हवा में दिलाने को साँस,
उसे साथ ले आयेगी मेरी औरत|
मैं कुछ और हू....ये तो नहीं
मैं कुछ और हू....ये तो नहीं
मैं कुछ और हू
ये तो नहीं
मुझमे हैं
उजाला भी
अँधेरा भी
मैं हु
गलत भी
सही भी
तुम सोचोगे
में भी तुम्हारी तरह
इंसान हू
पर..में कुछ और हू
ये तो नहीं
उस उजाले के
साए में
जो अँधेरा पनपे
उस सही में
तुझको जो गलत
दिखाई दे
उस हर एक गलत्
के साथ हर रोज
वो मैं हू
मैं कुछ और हू
ये तो नहीं.....
ये तो नहीं
मुझमे हैं
उजाला भी
अँधेरा भी
मैं हु
गलत भी
सही भी
तुम सोचोगे
में भी तुम्हारी तरह
इंसान हू
पर..में कुछ और हू
ये तो नहीं
उस उजाले के
साए में
जो अँधेरा पनपे
उस सही में
तुझको जो गलत
दिखाई दे
उस हर एक गलत्
के साथ हर रोज
वो मैं हू
मैं कुछ और हू
ये तो नहीं.....
मैं कौन हूँ
मैं कौन हूँ !!
दरख्तओ ने पूछा फूलो से , कौन हो तुम
फूल बस मुस्कुराते रहे, और उन्हें आता भी क्या है
सागर ने पूछा नदिया से, कौन हो तुम
नदी आकर मिल गई सागर में, और जाती भी कहा पर
मीनार पूछती है नींव के पत्थर से , कौन हो तुम
वो और नीचे को धसक गया , और बेचारा जाता भी कहा पर
सावन पूछता है बादल से , कौन हो तुम
बादल चला गया बरस कर, सावन को नही पता उसे किसने भिगोया
पतंग पूछती हैं मांझे से , क्यो पीछे पड़े हो मेरे
वो तो आसमान में पहुच गई हवा से बात करते करते
मैं पूछ बैठा मुझसे कि मैं कौन हूँ
आइना तोड के में सोने चला गया.
फूल बस मुस्कुराते रहे, और उन्हें आता भी क्या है
सागर ने पूछा नदिया से, कौन हो तुम
नदी आकर मिल गई सागर में, और जाती भी कहा पर
मीनार पूछती है नींव के पत्थर से , कौन हो तुम
वो और नीचे को धसक गया , और बेचारा जाता भी कहा पर
सावन पूछता है बादल से , कौन हो तुम
बादल चला गया बरस कर, सावन को नही पता उसे किसने भिगोया
पतंग पूछती हैं मांझे से , क्यो पीछे पड़े हो मेरे
वो तो आसमान में पहुच गई हवा से बात करते करते
मैं पूछ बैठा मुझसे कि मैं कौन हूँ
आइना तोड के में सोने चला गया.
Monday, January 19, 2009
इस जहां में प्यार महके जिन्दगी बाकी रहे
इस जहां में प्यार महके जिन्दगी बाकी रहे..
ये दुआ माँगो दिलों में रोशनी बाकी रहे।
दिल के आँगन में उगेगा ख्वाब का सब्जा जरूर
शर्त है आँखों में अपनी कुछ नमी बाकी रहे।
हर किसी से दिल का रिश्ता काश हो कुछ इस तरह
दुश्मनी के साए में भी दोस्ती बाकी रहे।
आदमी पूरा हुआ तो देवता बन जाएगा
ये जरूरी है कि उसमें कुछ कमी बाकी रहे।
लब पे हो नगमा वफा का दिल में ये जज्बा भी हो
लाख हों रुसवाइयां पर आशिकी बाकी रहे।
दिल में मेरे पल रही है ये तमन्ना आज भी
इक समंदर पी चुकूं और तिश्नगी बाकी रहे।
ये दुआ माँगो दिलों में रोशनी बाकी रहे।
दिल के आँगन में उगेगा ख्वाब का सब्जा जरूर
शर्त है आँखों में अपनी कुछ नमी बाकी रहे।
हर किसी से दिल का रिश्ता काश हो कुछ इस तरह
दुश्मनी के साए में भी दोस्ती बाकी रहे।
आदमी पूरा हुआ तो देवता बन जाएगा
ये जरूरी है कि उसमें कुछ कमी बाकी रहे।
लब पे हो नगमा वफा का दिल में ये जज्बा भी हो
लाख हों रुसवाइयां पर आशिकी बाकी रहे।
दिल में मेरे पल रही है ये तमन्ना आज भी
इक समंदर पी चुकूं और तिश्नगी बाकी रहे।
आज रूठा हुआ दोस्त बहुत याद आया
आज रूठा हुआ दोस्त बहुत याद आया
अच्छा गुजरा हुआ वक़्त बहुत याद आया|
मेरे आखों के हर एक अश्क पे रोने वाला दोस्त
आज आँख जब ये रोये तो तुम बहुत याद आये |
जो मेरे दर्द को सिने में छुपा लेता था
आज जब दर्द हुआ मुझको वो बहुत याद आया|
जो मेरे आँख में काजल की तरह रहता था
आज काजल जो लगाया तो बोहोत याद आया |
जो मेरे करीब था दिल के हर वक़्त उसी को
आज जब दिल ने बुलया तो बहुत याद आया|
अच्छा गुजरा हुआ वक़्त बहुत याद आया|
मेरे आखों के हर एक अश्क पे रोने वाला दोस्त
आज आँख जब ये रोये तो तुम बहुत याद आये |
जो मेरे दर्द को सिने में छुपा लेता था
आज जब दर्द हुआ मुझको वो बहुत याद आया|
जो मेरे आँख में काजल की तरह रहता था
आज काजल जो लगाया तो बोहोत याद आया |
जो मेरे करीब था दिल के हर वक़्त उसी को
आज जब दिल ने बुलया तो बहुत याद आया|
Zindagi hai choti
Zindagi hai choti,
har pal mein khush raho...
Office me khush reho,
ghar mein khush raho...
Aaj paneer nahi hai,
dal mein hi khush raho...
Aaj gym jane ka samay nahi,
do kadam chal ke he khush raho...
Aaj Dosto ka sath nahi,
TV dekh ke hi khush raho...
Ghar ja nahi sakte,
to phone kar ke hi khush raho...
Aaj koi naraaz hai,
uske iss andaz mein bhi khush raho..
Jisse dekh nahi sakte,
uski awaz mein hi khush raho...
Jisse paa nahi sakte,
uske yaad mein he khush raho..
MBA karne ka socha tha,
S/W mein he khush raho...
Laptop na mila to kya,
Desktop mein hi khush raho..
bita hua kal ja chuka hai,
uskie meeti yaadon me khush raho..
aane wale pal ka pata nahi..
sapno mein he khush raho..
Haste haste ye pal bitaenge,
aaj mein he khush raho..
Zindagi hai choti ,
har pal Khush raho...
har pal mein khush raho...
Office me khush reho,
ghar mein khush raho...
Aaj paneer nahi hai,
dal mein hi khush raho...
Aaj gym jane ka samay nahi,
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Aaj Dosto ka sath nahi,
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Ghar ja nahi sakte,
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MBA karne ka socha tha,
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Laptop na mila to kya,
Desktop mein hi khush raho..
bita hua kal ja chuka hai,
uskie meeti yaadon me khush raho..
aane wale pal ka pata nahi..
sapno mein he khush raho..
Haste haste ye pal bitaenge,
aaj mein he khush raho..
Zindagi hai choti ,
har pal Khush raho...
ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए
ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,
ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,
कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,
उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,
मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,
उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,
अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,
यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,
ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,
कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,
उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,
मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,
उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,
अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,
यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए
मत करो कोई वादा जिसे तुम निभा न सको
मत करो कोई वादा जिसे तुम निभा न सको, मत चाहो उसे जिसे तुम पा न सको, प्यार कहाँ किसी का पूरा होता है, इसका तो पहला शब्द ही अधूरा होता है.. !! ..माना की प्यार का पहला अक्षर अधूरा है, लेकिन 'प' को निकल दो तो यार रह जाता है और आप जैसा यार हो तो ज़िंदगी से भी प्यार हो जाता है ... यूं तो प्यार करने वाले तुम्हें कम न मिलेंगे, मिल जाएंगे हम जैसे बहुत पर हम न मिलेंगे. उन्हें भूलने की कोशिश की मैंने, दिल ने कहा याद करते रहना... वो हमारे दर्द की फरियाद सुने न सुने, अपना तो फ़र्ज़ है उन्हें प्यार करते रहना.. --------suresh
इस छोटी सी जिन्दगी के,गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ
इस छोटी सी जिन्दगी के,गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,
सब को अपना कह सकूँ,ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर,फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का,मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर,दीपक जलाना चाहता हूँ,
खुला आकाश मे हो घर मेरा,नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने,दूना लौटाना चाहता हूँ,
जब तक रहे ये जिन्दगी,खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ
इतने दोस्तो मे भी एक दोस्त की तलाश है मुझे
इतने अपनो मे भी एक अपने की प्यास है मुझे
छोड आता है हर कोइ समन्दर के बीच मुझे
अब डूब रहा हु तो एक सािहल की तलाश है मुझे
लडना चाहता हु इन अन्धेरो के गमो से
बस एक शमा के उजाले की तलाश है मुझे
तग आ चुका हु इस बेवक्त की मौत से मै
अब एक हसीन िजन्द्गी की तलाश है मुझे
दीवना हु मै सब यही कह कर सताते है मुझे
जो मुझे समझ सके उस शख्श की तलाश है मुझे
सब को अपना कह सकूँ,ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर,फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का,मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर,दीपक जलाना चाहता हूँ,
खुला आकाश मे हो घर मेरा,नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने,दूना लौटाना चाहता हूँ,
जब तक रहे ये जिन्दगी,खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ
इतने दोस्तो मे भी एक दोस्त की तलाश है मुझे
इतने अपनो मे भी एक अपने की प्यास है मुझे
छोड आता है हर कोइ समन्दर के बीच मुझे
अब डूब रहा हु तो एक सािहल की तलाश है मुझे
लडना चाहता हु इन अन्धेरो के गमो से
बस एक शमा के उजाले की तलाश है मुझे
तग आ चुका हु इस बेवक्त की मौत से मै
अब एक हसीन िजन्द्गी की तलाश है मुझे
दीवना हु मै सब यही कह कर सताते है मुझे
जो मुझे समझ सके उस शख्श की तलाश है मुझे
Friday, December 12, 2008
अगर सॉफ्टवेर इंजिनीयर्स फील्म बनते तो
AGAR SOFTWARE ENGINEERS FILM BANATE TO
FILM KA NAAM KUCH AISA HOTA
1. Hang To Hona Hi Tha !!!!!!!!!!!!
2. Meri Disc Tumhare Paas Hai
3. Aao Chat Kare
4. Programmer No.1
5. Mera Naam Developer
6. Java Wale Job Le Jayenge
7. Hum Apke Memory Mein Rehte Hein
8. Do Processor Baarah Terminal
9. Tera Code Chal Gaya
10. Har Din Jo Mail Karega
11. Network Ke Us Paar
12. Debugging Koi Khel Nahi
13. Jish Desh Mein Bill Gates Rehta Hai
14. Raju Ban Gaya Administrator .!
15. Client Ek Numbari Programmer Dus Numbari
16. Login Karo Sajana
18. Naukar PC Ka
19. 1942 -- A Bug Story
20. Kaho Na Virus Hai
21. Crash Se Crash Tak
22. Haan Maine Bhi Debug Kiya Hai
23. Password De Ke Dekho
24. Terminal Apna Login Parayi
25. Mr. Network Lal
FILM KA NAAM KUCH AISA HOTA
1. Hang To Hona Hi Tha !!!!!!!!!!!!
2. Meri Disc Tumhare Paas Hai
3. Aao Chat Kare
4. Programmer No.1
5. Mera Naam Developer
6. Java Wale Job Le Jayenge
7. Hum Apke Memory Mein Rehte Hein
8. Do Processor Baarah Terminal
9. Tera Code Chal Gaya
10. Har Din Jo Mail Karega
11. Network Ke Us Paar
12. Debugging Koi Khel Nahi
13. Jish Desh Mein Bill Gates Rehta Hai
14. Raju Ban Gaya Administrator .!
15. Client Ek Numbari Programmer Dus Numbari
16. Login Karo Sajana
18. Naukar PC Ka
19. 1942 -- A Bug Story
20. Kaho Na Virus Hai
21. Crash Se Crash Tak
22. Haan Maine Bhi Debug Kiya Hai
23. Password De Ke Dekho
24. Terminal Apna Login Parayi
25. Mr. Network Lal
दुर्गा रूप
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी।
तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः।
तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः।
जिंदगी क्या है
जिंदगी क्या है,
खुशियों के दायरे में से किसी ने कहा प्यार ही है, जिन्दगी.
थके राही ने कहा ,चलना ही है जिन्दगी
प्यासे राही ने कहा प्यास ही है जिन्दगी
दुखी आदमी ने कहा सुख से रहना ही है जिन्दगी,
मगर हमसे भी कोई पुच्छे की क्या है जिन्दगी ,
न गिरकर गिरकर उठने का नाम ही है जिन्दगी.
खुशियों के दायरे में से किसी ने कहा प्यार ही है, जिन्दगी.
थके राही ने कहा ,चलना ही है जिन्दगी
प्यासे राही ने कहा प्यास ही है जिन्दगी
दुखी आदमी ने कहा सुख से रहना ही है जिन्दगी,
मगर हमसे भी कोई पुच्छे की क्या है जिन्दगी ,
न गिरकर गिरकर उठने का नाम ही है जिन्दगी.
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